Wednesday, September 30, 2009

किस तरह हिफाज़त करते हैं हम कुरआन की


बहुत से लोगों को देखा है कि वो तिलावत के बाद कुरआन मजीद को हिफाज़त के साथ महफूज़ जगह पर रख देते हैं, पर हम जो कुरआन या कुरआन की आयात् हिफ्ज़ कर लेते हैं उनकी हिफाज़त क्यूँ नहीं करते? क्यूँ नहीं हम उस जगह की हिफाज़त करते जहाँ हमने आयात् हिफ्ज़ करके रखी है, हम उसी जगह पर कुरआन की आयात् को रखते हैं जहाँ पर किना, फरेब, नफरत, बदनीयती, बेईमानी और हसद रखते हैं, हम उसी मुह से तिलावत भी करते हैं और उसी से गाली भी बकते हैं, कुरान की हिफाज़त तो हम उचाई पर रख कर कर देते हैं पर हम उस कुरआन की हिफाज़त क्यूँ नहीं करते जो हमारे दिलों में हिफ्ज़ है ! इसलिए मेरी गुजारिश उन सभी लोगों से है कि वो इस इस दिल और ज़बान का ख्याल रखें और हिफाज़त करें उस कुरआन की जो आप के सीने में हिफ्ज़ है !

4 comments:

फ़िरदौस ख़ान said...

आपने सही कहा है...word verification हटा दें, ताकि लिखने में आसानी हो...

Anonymous said...

आपने सही कहा है...word verification हटा दें, ताकि लिखने में आसानी हो...

sohail onwork said...

good an eye opener! agar ham seene me rakhe Quran ki hifazat karne lag jayenge tab hamare hindu bhai hame shanti doot samjhenge abhi to woh hame aatankwadi samajhte hain

hamarivani said...

bohot khoob..sara sach..

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